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Published on 25 Aug 2013 | over 3 years ago

तेरा साथ हैं तो, मुझे क्या कमी हैं
अंधेरो से भी, मिल रही रोशनी हैं
कुछ भी नहीं हैं तो, कोई गम नहीं हैं
हैं एक बेबसी, बन गयी चांदनी हैं

टूटी हैं कश्ती, तेज हैं धारा
कभी ना कभी तो, मिलेगा किनारा
बही जा रही, ये समय की नदी हैं
इसे पार करने की आशा जगी हैं

हर इक मुश्किल सरल लग रही हैं
मुझे झोपडी भी महल लग रही हैं
इन आँखों में माना, नमी ही नमी हैं
मगर इस नमी पर ही दुनियाँ थमी हैं

मेरे साथ तुम मुस्कुरा के तो देखो
उदासी का बादल हटा के तो देखो
कभी हैं ये आँसू, कभी ये हँसी हैं
मेरे हमसफ़र, बस यही जिन्दगी हैं

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